रविवार, 1 जनवरी 2012
मंगलवार, 27 दिसंबर 2011
शुक्रवार, 19 अगस्त 2011
मैं रहूं, ना रहूं क्रांति की मशाल की जलती रहनी चाहिए : अन्ना
मैं रहूं, ना रहूं क्रांति की मशाल की जलती रहनी चाहिए : अन्ना
तिहाड़ से रामलीला मैदान पहुंचे अन्ना
अनशन में शामिल हुआ हजारों का सैलाब
नई दिल्ली। भष्टाचार के मुद्दे पर एक नई क्रांति की मशाल लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि मैं रहूं न रहूं, क्रांति की यह मशाल जलती रहनी चाहिए। उन्होंनें कहा कि यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। अन्ना हजारे तिहाड़ जेल में 67 घंटे का अनशन करने के बाद आज दोपहर जनसैलाब के साथ रामलीला मैदान पहुंचे और राह में उन्होंने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी की समाधि पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किये। उन्होंने एलान किया कि जब तक जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं होगा तब तक वह अनशन स्थल नहीं छोड़ेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता आज दोपहर लगभग सवा दो बजे भारी बरसात के बीच रामलीला मैदान पहुंचे तो वहां पहले से ही जनसैलाब उनके स्वागत व समर्थन के लिए मौजूद था। मैदान में मौजूद हजारों समर्थकों का हाथ हिलाकर स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह दूसरी क्रांति की शुरुआत है और ‘मैं रहूं, ना रहूं क्रांति की इस मशाल को जलते रहना चाहिये।’ उन्होंने कहा कि जब तक जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं होगा, तब तक हम यह अनशन स्थल नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जाने के साथ ही हमें आजादी मिली, लेकिन देश से भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ, अब यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि याह एक क्रांति की शुरुआत है। देश के सभी लोगों ने ये मशाल जलायी है। उन्होंने देश की जनता से आहवान किया कि क्रांति की इस मशाल को कभी बुझने नहीं दें। उन्होंने कहा कि चाहे मैं रहूं या ना रहूं मशाल जलती रहे। उन्होंने कहा कि जिस तरह जापान राख के ढेर से फिर उठ खड़ा हुआ, उसी तरह हमें भी उठना है। उन्होंने कहा कि अगर देश का युवा जाग गया तो इस देश का भविष्य उज्जवल है।
उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ लोकपाल ही नहीं, बल्कि पूरा परिवर्तन लाना है। देश में गरीबों को न्याय मिले, ऐसा बदलाव लाना है।’ उन्होंने कहा कि जब तक जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं होगा, तब तक वह रामलीला मैदान नहीं छोड़ेंगे। अनशन के पिछले चार दिन में उनका वजन कम हो जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि चार दिन में मेरा वजन तीन किलोग्राम कम हो गया है। लेकिन आप लोग जो आंदोलन चला रहे हैं, उससे मुझे ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने कहा कि वजन चाहे 10 किलोग्राम भी कम क्यों नहीं हो जाये, हमारा जोश कम नहीं होगा। ्रभष्टाचार पर रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिन गद्दारों ने इस देश को लूटा है, हम उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अब स्वतंत्रता के दूसरे संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है और इस संघर्ष का मकसद देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है। उन्होंने अपने समर्थकों से इस आंदोलन के दौरान हिंसा न करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने की भी अपील की।
अन्ना हजारे हालांकि दोपहर लगभग सवा दो बजे रामलीला मैदान में पहुंचे लेकिन मैदान में उनके समर्थकों का जमावड़ा सवेरे छह बजे से ही शुरु हो गया था। अन्ना के मैदान में पहुंचने से पहले ही केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग मैदान में पहुंच चुके थे और जब अन्ना मैदान में पहुंचे तो उसके बाद उनके समर्थकों का रेला मेंदान में उमड़ पड़ा। दिन में दो बार तेज बरसात हुई लेकिन बरसात के बावजूद उनके समर्थक टस से मस नहीं हुए और भीगते हुए ही अपनी अपनी जगह पर जमे रहे। मैदान में जमा लोगों में जबरदस्त उत्साह था, हर कोई हाथों में तिरंगा या पोस्टर लिए हुए था। लोगों की जबान पर बस बंदेमातरम या अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, जैसे नारे थे। मंच से जहां देश के विभिन्न हिस्सों में ्रभष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे कार्यकर्ता बारी बारी से संबोधन कर रहे थे वहीं युवाओं की एक टीम आजादी के तरानों व जनगीतों से लोगों में उत्साह भर रही थी। देर रात तक रामलीला मैदान में लोग डटे थे। रामलीला मैदान पर पहुंचने से पहले हज़ारे ने एक मिनी ट्रक पर सवार होकर तिहाड़ जेल से मायापुरी तक जुलूस निकाला और फिर वहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे। उन्हें इंडिया गेट भी जाना था लेकिन वह इंडिया गेट नहीं गये।
राजपथ पर उतरी अन्ना की सेना
राजपथ पर उतरी अन्ना की सेना
इंडिया गेट से जंतर मंतर तक हुआ एतिहासिक मार्च
लगभग एक लाख लोग हुए मार्च में शामिल
जन जन में दिखाई दिया अन्ना का अक्श
संजय टुटेजा
नई दिल्ली। राजधानी का राजपथ पर बुधवार की शाम ऐतिहासिक परेड का साक्षी बना। यह परेड भारतीय सेना के जवानो की नहीं बल्कि ्रभष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के लिए लड़ने उतरी सेना की थी। इस सेना में पुरूष भी थे तो महिलाएं भी थी, युवा भी थे और वृद्ध भी, अपंग भी थे और नेत्रहीन भी। इस सेना के हर सैनिक में मानों अन्ना का अक्श दिखाई दे रहा था और इन सैनिकों के हर कदम पर देश भक्ति का जजबा, उत्साह और रोमांच हिलौरें ले रहा था। कहीं देश के लिए मरमिटने के सुर थे तो कहीं आजादी के तरानों की ताल। हाथों में तिरंगा लिये एक जनसैलाब के रूप में यह सेना बढ़े जा रही थी जंग के उस रास्ते पर जो जंग अन्ना हजारे ने शुरु की है।
्रभष्टाचार के खिलाफ शुरु हुई लड़ाई को जीतने के लिए राजपथ पर उतरी अन्ना की इस सेना की अगुवाई के लिए स्वयं अन्ना भले ही वहां नहीं थे लेकिन इस जनसैलाब में शामिल हर शख्स मानों स्वयं अन्ना बनकर सरकार को चुनौती दे रहा था। शाम लगभग चार बजे ही विजय चौक से इंडिया गेट की ओर अन्ना की सेना का ऐसा कारवां शुरु हुआ जो देर रात तक नहीं थमा। केवल राजपथ ही नहीं इंडिया गेट की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर अन्ना के समर्थकों का कारवां आजादी के दीवानों की तरह मानों मर मिटने के लिए बढ़ रहा था। अन्ना के इन सैनिकों की एक खासियत यह थी कि इनके हाथों में हथियार नहीं बल्कि देश की अस्मिता का प्रतीक तिरंगा था या फिर ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखे नारे किसी भी ्रभष्ट व्यवस्था को शर्मसार करने के लिए काफी थे।
्रभष्टाचार से लड़ने का जुनून इस कदर था कि कहीं कोई महिला अपने दूध मुंहे बच्चों को गोद में लिए लक्ष्य की ओर कदम से कदम बढ़ा रही थी तो कहीं व्हील चेयर पर विकलांग भी इस परेड में निरंतर आगे बढ़ने दिखाई दिये। बेसाखी के सहारे चलने वाले कई अपंगो को आज शायद बैसाखी की भी जरूरत नहीं थी। इस सेना में शामिल युवा ही विकलांगों की बैसाखी बनकर उन्हें इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बना रहे थे। जिन लोगों ने आजादी का आंदोलन नहीं देखा उनके लिए तो यह एक नई आजादी के आंदोलन की तरह था और इस आंदोलन में शामिल लोगों को आंदोलन का हिस्सा होने पर गर्व था। इतना बड़ा जनसैलाब, फिर भी न कहीं कोई उपद्रव और न कोई जाम। इस आंदोलन में शामिल सभी लोग एक अनुशासित सिपाही की तरह आगे बढ़ रहे थे। राजपथ से इंडिया गेट और इंडिया गेट से जंतर मंतर की ओर शुरु हुआ यह मार्च देर रात तक जारी रहा। जंतर मंतर बस वंदेमातरम तथा अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं जैसे नारों से गूंज रहा था। समाज का कोई वर्ग शायद ऐसा नहीं था जो आज के इस आंदोलन का हिस्सा नहीं था। आटो चालक हों या फिर रिक्शा चालक, इंजीनियर हों या डाक्टर, गृहणियां हों या फिर कामकाजी महिलाएं, स्कूली बच्चे हों या फिर कालेज के छात्र छात्राएं हर कोई तो आज इस आंदोलन का हिस्सा था
रविवार, 28 नवंबर 2010
एलजी व शीला के टकराव पर गेंद अब केन्द्र के पाले में
शीला के गर्म तेवर के बाद शीला खेमे में है खलबली
यूडी व गृहमंत्रालय पर हमला पड़ सकता है महंगा
नई दिल्ली। सर्किल रेट मुद्दे पर सरकार व एलजी के बीच शुरु हुए टकराव के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के गर्म तेवर व जवाबी हमले ने एलजी व सरकार के बीच की खाई को न केवल और चैड़ा कर दिया है बल्कि संवैधानिक अधिकारों को लेकर ऐसी बहस शुरु कर दी है जिसका जवाब अब केवल केन्द्र को देना है। शीला ने एलजी के साथ साथ केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय व गृह मंत्रालय को भी जिस तरह निशाना बनाया है वह मुख्यमंत्री को महंगा भी पड़ सकता है। शीला के गर्म तेवर से हालांकि शीला खेमा उत्साहित है लेकिन मुख्यमंत्री के नजदीकी भी शीला के हमले को केन्द्र सरकार पर हमला मान रहे हैं, यही कारण है कि किसी भी अनहोनी को लेकर उनमें खलबली मची है।
सर्किल रेट के मुद्दे पर सरकार व राजनिवास के बीच शुरु हुई लड़ाई अब दोनों ही पक्षों के लिए नाक की लड़ाई बन गई है। शीला दीक्षित द्वारा एलजी के अधिकारों को सीधी चुनौती देने तथा एक के बाद एक मिसाइलें एलजी पर दागे जाने के बाद भी राजनिवास अभी खामोश है और कोई प्रतिक्रिया राजनिवास की ओर से नहीं आई है। सर्किल रेट की फाइल दोनों बार लौटाते समय भी राजनिवास ने सरकार के संवैधानिक अधिकारों पर न तो कोई टिप्पणी की थी और न ही सरकार को कोई सीधी चुनौती दी थी। राजानिवास ने दोनों बार केवल अपने सुझाव दिये थे, बावजूद इसके शीला दीक्षित ने एलजी पर सीधा हमला किया है बल्कि एलजी के संवैधानिक अधिकारों को चुनौती देने के लिए विधानसभा को माध्यम बनाया।
केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन की की सरकार है और उपराज्यपाल की नियुक्ति केन्द्र ही करता है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपनी बात विधानसभा में इस चर्चा से पहले ही गृह मंत्रालय के समक्ष रख चुकी थी, बावजूद इसके इतनी जल्दी विधानसभा में एलजी पर सीधा हमला करने की जरूरत क्यों पड़ी और इस हमले में एलजी के साथ साथ केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय और गृह मंत्रालय को निशाना क्यों बनाया गया, यह एक ऐसा सवाल है जिसका कई तरह से विशलेषण किया जा रहा है। राजनैतिक विशलेषक इसे शीला का केन्द्र सरकार व पार्टी आलाकमान पर सीधा हमला भी मान रहे हैं, जो मुख्यमंत्री के लिए मंहगा भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री खेमे के विधायक व मंत्री भी मानते हैं कि शीला ने एलजी,यूडी व गृहमंत्रालय पर हमला कर केन्द्र से सीधी लड़ाई शुरु कर दी है।
हालांकि विधानसभा में चर्चा पूर्ण राज्य को लेकर थी, इस तरह की चर्चाएं विधानसभा का हिस्सा हो सकती हैं लेकिन यदि सरकार की मंशा यदि वास्तव में दिल्ली को पूर्ण राज्य देने का होती तो सरकार विधानसभा में चर्चा कराने से पहले केबिनेट से भी यह प्रस्ताव पारित कर सकती थी, लेकिन शायद असली मंशा एलजी पर हमला करना था, यही कारण है कि इस चर्चा की शुरुआत करने वाले विधायक मुकेश शर्मा से लेकर शिक्षा मंत्री अरविन्दर सिंह लवली व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तक सभी के निशाने पर एलजी ही रहे। यहां यह भी गौरतलब है कि विधानसभा में हुई यह चर्चा पूर्व नियोजित थी और इस पर उसी दिन सवेरे केबिनेट में भी चर्चा हुई थी। सूत्रो के अनुसार केबिनेट में ही शिक्षा मंत्री अरविन्दर सिंह लवली को भी इस मुद्दे पर बोलने के लिए अधिकृत किया गया था।
अब चूंकि शीला व एलजी के बीच शुरु हुई इस लड़ाई की गूंज पूरी दिल्ली में सुनाई दे रही है, ऐसे में अब सभी केन्द्र की ओर देख रहे हैं। चूंकि एलजी केन्द्र के प्रतिनिधि हैं ऐसे में केन्द्र शीला के भाषण को पार्टी अनुशासन की सीमा में मानता है या फिर सीमा के बाहर यह भी एक बड़ा सवाल है। इतना निश्चित है कि यदि केन्द्र शीला के तेवर को सहमति देता है तो एलजी के संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक नई तहरीर लिखी जायेगी।
मंगलवार, 24 अगस्त 2010
मिनी एयरपोर्ट बनेगा नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन
नई दिल्ली। राजधानी का नई दिल्ली रेलवे स्टेशन मिनी एयरपोर्ट टर्मिनल बनेगा। नई दिल्ली से आईजीआई एयरपोर्ट जाने वाली एयरपोर्ट एक्सप्रेस-वे मेट्रो लाइन सितम्बर माह में शुरू होगी और इसका किराया 150 रुपए होगा। यह लाइन शुरू होने के बाद नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन राजधानी का पहला सिटी एयरपोर्ट टर्मिनल होगा। इस स्टेशन की एक विशेषता यह भी है कि कुल पांच फ्लोर्स में 4.30 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में बना यह राजधानी का सबसे बड़ा मेट्रो स्टेशन होगा। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए बनाई गई इस लाइन की खासियत यह है कि यात्रियों को एयरपोर्ट पर चेक-इन करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। यह ट्रेन नई दिल्ली से शुरू होगी और यहीं यात्री चेक-इन कर सकेंगे। यात्रियों का सामान संबंधित एयरलाइंस द्वारा सीधे उड़ान में भेज भेजने की व्यवस्था की जा रही है। स्टेशन पर कुल 10 एयरलाइंस के काउंटर होंगे, जहां से यात्री अपना चेक-इन कराकर बोर्डिग पास ले सकेंगे। नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को कुल पांच फ्लोर में बनाया जा रहा है और एयरपोर्ट की तरह ही यहां प्रस्थान व आगमन के लिए अलग-अलग मिनी टर्मिनल है। पांच फ्लोरों में दो फ्लोर आगमन व प्रस्थान भूतल से उपर बनाए जा रहे है, जबकि कानकोर्स, प्लेटफार्म व मध्यतल जमीन के नीचे बनाए गए है। राजधानी के आम मेट्रो स्टेशनों से यह लगभग तीन गुना बड़ा स्टेशन होगा। इस स्टेशन के साथ मल्टीलेवल पार्किंग भी बनाई गई है। स्टेशन के प्रस्थान टर्मिनल तक जाने व अराइवल टर्मिनल से आने के लिए यात्रियों को बैगेज ट्रालियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा स्टेशन पर रेस्टोरेंट और खान-पान के अन्य आउटलेट्स व क्योस्क भी होंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में एस्केलेटर व लिफ्ट के अलावा 17 ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन द्वार होंगे। इसके अलावा यात्रियों को उड़ान की जानकारी देने के लिए विभिन्न स्थानों पर डिस्पले बोर्ड भी होंगे। सुरक्षा की ष्टि से भी स्टेशन पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे है। स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। इस लाइन पर कुल छह स्टेशन होंगे, जिनमें नई दिल्ली के अलावा शिवाजी टर्मिनल, धौलाकुआं, नेशनल हाईवे-8, आईजीआई व द्वारका सेक्टर-21 है। यह लाइन लगभग बनकर तैयार है और सभी स्टेशनों पर सभी जरूरी उपकरण लगा दिए गए है। अगले कुछ दिनों में इस लाइन पर ट्रायल रन शुरू होने की संभावना है। रिलायंस इन्फास्ट्रक्चर द्वारा बनाई जा रही इस लाइन को कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले ही सितम्बर माह में शुरू कर दिया जाएगा। यह लाइन शुरु होने के बाद नई दिल्ली से आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचने में लगभग 20 मिनट लगेंगे। 150 20 रुपए होगा कनॉट प्लेस से एयरपोर्ट तक का किराया मिनट में नई दिल्ली से पहुंचेंगे एयरपोर्ट कुल 4.30 लाख वर्ग फुट में बना है यह मेट्रो स्टेशन, पांच फ्लोर है यहां, भूतल से ऊपर होगा आगमन व प्रस्थान रेलवे व मेट्रो का जंक्शन बनेगा नई दिल्ली स्टेशन, राजधानी का पहला सिटी एयरपोर्ट टर्मिनल होगा स्टेशन पर ही होगी चेक-इन की सुविधा, 10 एयरलाइंस कंपनियों के काउंटर होंगे यहां स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से रखी जाएगी नजर, उड़ानों के समय से संबंधित डिस्पले बोर्ड भी होंगे सितम्बर में शुरू होगी नई दिल्ली- एयरपोर्ट एक्सप्रेस-वे लिंक सेवा जल्द शुरू होगा रविवार, 4 जुलाई 2010
साहब शहर से बाहर लेकिन कार दौड़ती रही घर से आफिस
साहब शहर से बाहर लेकिन कार दौड़ती रही घर से आफिस
उद्योगायुक्त की गैरमौजूदगी में 450 किलोमीटर दौड़ी उनकी कार
आरटीआई के जवाब में हुआ इस धांधली का खुलासा
गृहमंत्राी से की उद्योगायुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। इसे विज्ञान का चमत्कार कहें या फिर जादू लेकिन यह हकीकत है कि कमिश्नर इण्डस्ट्री लगभग एक सप्ताह की छुट्टी पर दिल्ली से बाहर रहे और उनकी सरकार कार उन्हें लेकर उनके घर से कार्यालय व सचिवालय के चक्कर लगाती रही। वास्तविकता में भले ही यह संभव न हो लेकिन उनकी सरकारी कार ने यह कारनामा कर दिखाया है। उनकी गैर मौजूदगी में उनकी कार लगभग एक सप्ताह तक 450 किलोमीटर से अधिक सड़को ंपर दौड़ी है और यह दौड़ उनके घर से कार्यालय व सचिवालय के बीच ही हुई है। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में होने के बाद इसकी शिकायत केन्द्रीय गृह मंत्राी पी चिदंबरम से भी की गई है।
दिल्ली के कमिशनर इण्डस्ट्री के पद पर वर्तमान में आईएएस अधिकारी चेतन बी सांघी तैनात हैं। इसके अलावा उनके पास डीएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक के अलावा दिल्ली खादी विलेज बोर्ड का भी प्रभार है। उद्योग आयुक्त सांधी 15 फरवरी सोमवार को तीन दिन की छुट्टी पर हैदराबाद गये थे। इस छुट्टी की अनुमति उन्होंने मुख्य सचिव से ली थी और छुट्टी का घरेलू कारण बताया था, बाद में उन्होंने निजी कार्य का हवाला देते हुए छुट्टी को 19 फरवरी तक बढ़ा लिया। उनके छुट्टी पर जाने से दो दिन पहले 13 व 14 फरवरी को शनिवार व रविवार होने के कारण छुट्टी थी। इस प्रकार वह सात दिन छुट्टी पर रहे।
उनके छुट्टी पर रहने के बावजूद कमिशनर इण्डस्ट्री के रूप में मिली उन्हें मिली सरकारी कार संख्या डीएन 5 सीएफ 9990 सड़कों पर दौड़ती रही। कार की लाॅग बुक बताती है कि 13 फरवरी को कार दिल्ली सचिवालय से बसंतकुंज, डीएसआईआईडीसी, बसंतकुंज और फिर दिल्ली सचिवालय के बीच सवेरे 8 बजे से शाम 7 बजे तक 84 किलोमीटर दौड़ी।
15 फरवरी को जिस दिन कमिशनर इण्डस्ट्री हैदराबाद में थे, उस दिन उनकी सरकारी कार सवेरे 7.30 बजे से रात 10.30 बजे तक दिल्ली सचिवालय से बसंतकुंज उनके आवास, फिर डीएसआईआईडीसी कार्यालय, और फिर घर से होती हुई सचिवालय तक 135 किलोमीटर दौड़ी। इसके बाद 16 फरवरी को 88 किलोमीटर व 17 फरवरी को 100 किलोमीटर उनके घर से कार्यालयों के बीच उनकी कार दौड़ती रही। लागबुक के ‘दफ्तरी गाड़ी का इस्तेमाल करने वाले अधिकारी का नाम और पद’ के कालम में कमिशनर इण्डस्ट्री के रूप में ‘सी आई’ दर्शाया गया है जो यह बताता है कि कार कमिश्नर इण्डस्ट्री को लेकर दौड़ती रही।
यह सारी जानकारी डीएसआईआईडीसी ने एक आरटीआई के जवाब में दी है। आरएन बरारिया नामक व्यक्ति द्वारा मांगी गई इस जानकारी का जवाब 20 मई को दिया गया है। आरटीआई का जवाब मिलने के बाद आरएन बरारिया ने कमिश्नर इण्डस्ट्री चेतन बी सांघी पर सरकारी कार का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत केन्द्रीय गृहमंत्राी पी चिदंबरम से की है।
गृहमंत्राी को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि कमिश्नर इण्डस्ट्री की सरकारी कार फरवरी माह के 24 दिन में 2529 किलोमीटर दौड़ी है जिससे पता चलता है कि प्रतिदिन औसतन 106 किलोमीटर उनकी कार सड़कों पर दौड़ती रही है। प्रतिदिन राजधानी के भीतर इतनी दूरी तय करने में किसी भी वाहन को 4 से 5 घंटे लगते हैं। शिकायती पत्रा में कहा गया है कि लगभग 5 घंटे अपनी कार में व्यतीत कर इण्डस्ट्री कमिश्नर एक साथ डीएसआईआईडीसी व कमिश्नर इडस्ट्री के अलावा खादी विलेज इण्डस्ट्री बोर्ड का कामकाज कैसे करते होंगे। बरारिया ने चिदंबरम को भेजे पत्रा में इसे धोखाधड़ी का मामला बताते हुए इसके लिए सीधे सीधे कमिश्नर इडस्ट्री को जिम्मेदार बताया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उद्योगायुक्त की गैरमौजूदगी में 450 किलोमीटर दौड़ी उनकी कार
आरटीआई के जवाब में हुआ इस धांधली का खुलासा
गृहमंत्राी से की उद्योगायुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। इसे विज्ञान का चमत्कार कहें या फिर जादू लेकिन यह हकीकत है कि कमिश्नर इण्डस्ट्री लगभग एक सप्ताह की छुट्टी पर दिल्ली से बाहर रहे और उनकी सरकार कार उन्हें लेकर उनके घर से कार्यालय व सचिवालय के चक्कर लगाती रही। वास्तविकता में भले ही यह संभव न हो लेकिन उनकी सरकारी कार ने यह कारनामा कर दिखाया है। उनकी गैर मौजूदगी में उनकी कार लगभग एक सप्ताह तक 450 किलोमीटर से अधिक सड़को ंपर दौड़ी है और यह दौड़ उनके घर से कार्यालय व सचिवालय के बीच ही हुई है। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में होने के बाद इसकी शिकायत केन्द्रीय गृह मंत्राी पी चिदंबरम से भी की गई है।
दिल्ली के कमिशनर इण्डस्ट्री के पद पर वर्तमान में आईएएस अधिकारी चेतन बी सांघी तैनात हैं। इसके अलावा उनके पास डीएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक के अलावा दिल्ली खादी विलेज बोर्ड का भी प्रभार है। उद्योग आयुक्त सांधी 15 फरवरी सोमवार को तीन दिन की छुट्टी पर हैदराबाद गये थे। इस छुट्टी की अनुमति उन्होंने मुख्य सचिव से ली थी और छुट्टी का घरेलू कारण बताया था, बाद में उन्होंने निजी कार्य का हवाला देते हुए छुट्टी को 19 फरवरी तक बढ़ा लिया। उनके छुट्टी पर जाने से दो दिन पहले 13 व 14 फरवरी को शनिवार व रविवार होने के कारण छुट्टी थी। इस प्रकार वह सात दिन छुट्टी पर रहे।
उनके छुट्टी पर रहने के बावजूद कमिशनर इण्डस्ट्री के रूप में मिली उन्हें मिली सरकारी कार संख्या डीएन 5 सीएफ 9990 सड़कों पर दौड़ती रही। कार की लाॅग बुक बताती है कि 13 फरवरी को कार दिल्ली सचिवालय से बसंतकुंज, डीएसआईआईडीसी, बसंतकुंज और फिर दिल्ली सचिवालय के बीच सवेरे 8 बजे से शाम 7 बजे तक 84 किलोमीटर दौड़ी।
15 फरवरी को जिस दिन कमिशनर इण्डस्ट्री हैदराबाद में थे, उस दिन उनकी सरकारी कार सवेरे 7.30 बजे से रात 10.30 बजे तक दिल्ली सचिवालय से बसंतकुंज उनके आवास, फिर डीएसआईआईडीसी कार्यालय, और फिर घर से होती हुई सचिवालय तक 135 किलोमीटर दौड़ी। इसके बाद 16 फरवरी को 88 किलोमीटर व 17 फरवरी को 100 किलोमीटर उनके घर से कार्यालयों के बीच उनकी कार दौड़ती रही। लागबुक के ‘दफ्तरी गाड़ी का इस्तेमाल करने वाले अधिकारी का नाम और पद’ के कालम में कमिशनर इण्डस्ट्री के रूप में ‘सी आई’ दर्शाया गया है जो यह बताता है कि कार कमिश्नर इण्डस्ट्री को लेकर दौड़ती रही।
यह सारी जानकारी डीएसआईआईडीसी ने एक आरटीआई के जवाब में दी है। आरएन बरारिया नामक व्यक्ति द्वारा मांगी गई इस जानकारी का जवाब 20 मई को दिया गया है। आरटीआई का जवाब मिलने के बाद आरएन बरारिया ने कमिश्नर इण्डस्ट्री चेतन बी सांघी पर सरकारी कार का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत केन्द्रीय गृहमंत्राी पी चिदंबरम से की है।
गृहमंत्राी को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि कमिश्नर इण्डस्ट्री की सरकारी कार फरवरी माह के 24 दिन में 2529 किलोमीटर दौड़ी है जिससे पता चलता है कि प्रतिदिन औसतन 106 किलोमीटर उनकी कार सड़कों पर दौड़ती रही है। प्रतिदिन राजधानी के भीतर इतनी दूरी तय करने में किसी भी वाहन को 4 से 5 घंटे लगते हैं। शिकायती पत्रा में कहा गया है कि लगभग 5 घंटे अपनी कार में व्यतीत कर इण्डस्ट्री कमिश्नर एक साथ डीएसआईआईडीसी व कमिश्नर इडस्ट्री के अलावा खादी विलेज इण्डस्ट्री बोर्ड का कामकाज कैसे करते होंगे। बरारिया ने चिदंबरम को भेजे पत्रा में इसे धोखाधड़ी का मामला बताते हुए इसके लिए सीधे सीधे कमिश्नर इडस्ट्री को जिम्मेदार बताया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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