शनिवार, 5 जुलाई 2008

हाईप्रोफाइल होता सेक्स कारोबार

संजय टुटेजा

व्हाइट स्किन, रेड स्किन, ब्लैक स्किन के अलग अलग हैं दाम
मोबाइल और इंटरनेट से होता है सम्पर्क
पोर्न वेबसाइटस के जरिए अपने नेटवर्क को मजबूत बनाते हैं दलाल

  • बड़ी कोठियां, फार्म हाऊस और बड़े होटल हैं एशगाह
  • टुरिस्ट वीजा पर आती हैं विदेशी कालगर्ल
  • उजबेकिस्तान, अजरबेजान, रशिया, नेपाल व भूटान से काल गर्ल लाते हैं ट्रेवल एजेंट
  • दलालों से होता है मासिक कान्ट्रेक्ट
  • बदला है दलालों का भी रूप रंग, दलाल भी हैं हाई प्रोफाइल
  • मंहगी कारों से होती है कालगर्ल की डिलिवरी
  • बातचीत में भी होता है फर्राटेदार अंग्रेजी का प्रयोग
  • नये ग्राहकों को जल्दी नहीं मिलती एण्ट्री
  • दलालों का है बड़ा नेटवर्क
  • बड़े उद्योगपति और बड़ी कंपनियों के अधिकारी है नियमित ग्राहक
  • चलता है साथ साथ नशे का कारोबार भी
  • पुलिस से बचने के लिए बदले पुराने तौर तरीकेपुलिस के सामने भी हैं कई मुश्किलें
संजय टुटेजा
नई दिल्ली 1 सितंबर।
हाईप्रोफाइल होती राजधानी में अब सेक्स का कारोबार भी हाईप्रोफाइल हो रहा है। इस हाईप्रोफाइल सेक्स कारोबार में दलालों, कालगर्ल और ग्राहकों के बीच संपर्क का माध्यम अब मोबाइल और इंटरनेट है। इस धंधे के दलाल भी बड़ी कंपनियों के एक्जक्यूटिव सरीखे हाईप्रोफाइल हैं और इन दलालों का नेटवर्क केवल राजधानी तक ही सीमित नहीं बल्कि देश के तमाम शहरों में दलालों के तार हैं। महंगी कारों के माध्यम से कालगर्ल की डिलीवरी करने वाले यह दलाल ग्राहक की मांग पर किसी भी शहर में देशी व विदेशी कालगर्ल उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। ब्लेक स्किन, व्हाइट स्किन और रेड स्किन आदि हर तरह का स्वाद ग्राहकों को कीमत देने पर उपलब्ध होता है। राजधानी में गली मौहल्लों से सिमट कर यह धंधा अब बड़ी कोठियांे, फार्म हाऊस और बड़े होटलों तक पहुंच गया है। मौज मस्ती और अय्याशी के लिए अब किसी रेडलाइट एरिया या किसी पतली गली के किसी कोठे पर जाने की जरूरत नहीं, बस मोबाइल पर एक काॅल और इंटरनेट पर एक क्लिक में मन चाही कालगर्ल उपलब्ध है। हालांकि मजदूर वर्ग, ड्राईवर वर्ग व लोप्रोफाइल लोगों के लिए अब भी रेडलाइट एरिया की गलियां खुली हैं लेकिन सेक्स के खेल में डूब रहे हाईप्रोफाइल लोगों ने इस धंधे को भी हाईप्रोफाइल बना दिया है। अब तक सेक्स के इस कारोबार में गरीब व मजबूर लड़कियों की तादाद ही देखी जाती थी लेकिन अब इस कारोबार में न केवल विदेशी लड़कियां भी शामिल हैं बल्कि माडल, कालेज गर्ल और बहुत जल्दी ऊंची छलांग लगाने की महत्वाकांक्षा रखने वाली मध्यमवर्ग की लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। पिछले दिनों विदेशी कालगर्ल के एक राकेट का पर्दाफाश कर आधा दर्जन विदेशी कालगर्ल को पकड़ने वाले पुलिस अधिकारी के अनुसार अब कालगर्ल और दलालों की पहचान मुश्किल हो गई है क्योंकि दलालों और कालगर्ल की वेशभूषा, पहनावा व भाषा हाईप्रोफाइल है और उनका काम करने का ढंग भी पूरी तरह सुरक्षित है। पुलिस सूत्रों के अनुसार राजधानी में उज्बेकिस्तान, अजरबेचान व रशिया से ट्रेवल एजेंटों के माध्यम से टुरिस्ट वीजा पर लड़कियां आती हैं और बड़े उद्योगपतियों, अधिकारियों व विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करती हैं। कालगल्र्स और दलालों का नेटवर्क दो स्तरों पर है, एक अत्यंत हाईप्रोफाइल है जिसमें माडल, फेशनेबल, फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली और आधुनिक वेशभूषा पहनने वाली कालगर्ल शामिल हैं और दूसरा नेटवर्क महाराष्ट्र, सिक्किम, पश्चिमी बंगाल, बिहार, नेपाल और भूटान से लाई गई लड़कियों का है। ग्राहक की मांग के अनुसार ही कालगर्ल उपलब्ध कराई जाती है। कालगर्ल को भुगतान भी अब मासिक वेतन या फिर कान्ट्रेक्ट के आधार पर किया जाता है। अमूमन बिहार नेपाल, भूटान, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि से लाई जाने वाली लड़कियों को दो से तीन लाख रुपये में छह माह के ठेके पर लाया जाता है जबकि हाईप्रोफाइल कालगर्ल को लाख से दो लाख रुपये प्रति माह की निश्चित रकम दलाल की ओर से अदा की जाती है।समूचा कारोबार इंटरनेट या मोबाइल से ही चलता है और किसी भी ग्राहक को दलाल या कालगर्ल का पता नहीं दिया जाता। जगह की व्यवस्था करने का रिस्क दलाल अब कतई नहीं लेते, ग्राहक को स्वयं करनी होती है, और किसी भी नये ग्राहक को कालगर्ल की डिलीवरी नहीं दी जाती। ग्राहक को एक निश्चित स्थान पर कालगर्ल की डिलीवरी किसी मंहगी कार के माध्यम से कर दी जाती है और फिर वहां से ग्राहक अपने वाहन से ही कालगर्ल को मनचाहे स्थान पर ले जाता है। अमूमन यह स्थान बड़े होटल, बड़ी कोठियां या फिर फार्महाऊस होते हैं। सभी दलालों और कालगर्ल के नियमित ग्राहक हैं और दलाल नियमित ग्राहकों के पास ही कालगर्ल भेजना पसंद करते हैं। यह दलाल इंटरनेट की पोर्न वेबसाइटों के जरिए एक दूसरे से सम्पर्क साध कर अपने नेटवर्क को मजबूत बनाते हैं। नार्थजोन के पुलिस उपायुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार कालगर्ल सीधी डील नहीं करती और दलाल भी केवल विश्वसनीय डील ही करते हैं, किसी भी कीमत पर किसी नये ग्राहक से डील नहीं की जाती, पुराने सम्पर्क के आधार पर ही डील की जाती है। यही कारण है कि पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं। उन्होंने बताया कि दलालों के अपने कोडवर्ड हैं जिनका इस्तेमाल कर वह ग्राहकों से बातचीत करते हैं। वह कहते हैं कि दलालों और कालगल्र्स का ट्रेंड बदल जाने के कारण ही पुलिस को इन तक पहुंचने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

4 टिप्‍पणियां:

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

बढिया प्रयास है आपका, धन्यवाद । इस नये हिन्दी ब्लाग का स्वागत है ।
पढें हिन्दी ब्लाग प्रवेशिका

Fransic ने कहा…

kya khub kaha hai aapne ...

Amit K. Sagar ने कहा…

बहुत खूब. लिखते रहिये जनाब. शुक्रिया व् शुभकामनायें.
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उल्टा तीर

संजय टुटेजा ने कहा…
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