शुक्रवार, 18 जुलाई 2008

परमाणु करार पर सोनिया ने दिखाए तीखे तेवर

परमाणु करार व राष्ट्रहित के मुद्दे पर किसी के प्रमाणपत्रा की जरुरत नहीं: सोनिया
समझौते के मूड में नहीं है कांग्रेस,
चुनाव के लिए भी तैयार दिखाई दी सोनिया


संजय टुटेजा
नेल्लूर 17 जुलाई।

परमाणु करार मुद्दे पर संकट में घिरी कांग्रेस कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। यही नहीं पार्टी इस मुद्दे पर जनता के बीच जाने को भी तैयार दिखाई दे रही है। यूपीए चेयरमैन एवं कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने इस परमाणु करार को देश के लिए लाभकारी बताते हुए वामदलों व करार का विरोध कर रहे अन्य दलों के प्रति तीखे तेवर दिखाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस को अपनी देशभक्ति, विदेश नीति एवं परमाणु करार के मुद्दे पर किसी से प्रमाणपत्रा की जरूरत नहीं है। यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी ने आज आन्ध्रपदेश के अपने दौरे के दौरान नेल्लूर के एसी सुब्बारेडडी स्टेडियम में कांग्रेस की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए परमाणु करार मुद्दे पर पार्टी और सरकार का पक्ष रखा साथ ही यह संकेत भी दिये कि किसी भी परिणाम के लिए पार्टी तैयार है और समझौते के कतई मूड में नहीं है। अपने दौरे के दौरान कांग्रेस अध्यक्षा ने यहां प्रदेश के 1.86 करोड बीपीएल कार्ड धारकों के लिए राजीव आरोग्यश्री स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की एवं कृष्णापट्टम बंदरगाह का उद्घाटन कर इस बंदरगाह को देश को समर्पित करने के साथ साथ आन्ध्रप्रदेश के प्रमुख नेता दामोदरन संजीवैय्या के नाम पर 800 मेगावाट के दो थर्मल प्वार प्लांट की नींव भी रखी। तपती धूप में स्टेडियम को खचाखच भरा देख कांग्रेस अध्यक्षा उत्साहित थी, जनसैलाब को देखकर उनके तेवर आक्रामक तो दिखाई दिये लेकिन उन्होंने वामदलों के प्रति कठोर शब्दों का प्रयोग करने से परहेज किया। उन्होंने अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्राी श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की शहादत का भी जिक्र किया और कांग्रेस द्वारा ही देश को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर साख प्रदान किये जाने की बात कही। उन्होने कहा कि कांग्रेस ने ही देश को परमाणु कार्यक्रम दिया व स्वतंत्रा विदेश नीति दी। उन्होंने कहा कि जिस करार के जरिए हम देश में परमाणु प्लांट लगा सकते हैं और देश में आधुनिक तकनीक ला सकते हैं, उसी करार के मुद्दे पर वामदलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। यह मुद्दा कांग्रेस व सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है, यह सवाल जनता पूछ सकती है, यह करार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश को ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा चाहिए। उन्होंने कहा कि इस करार से देश के किसानों, अस्पतालों, उद्योगों व आम नागरिकों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी। देश में अभी कोयले व पानी से बिजली का उत्पादन हो रहा है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, मांग लगातार बढ रही है, यही कारण है कि आधुनिक परमाणु तकनीक व ईंधन की जरूरत है। जब सरकार यह तकनीक ला रही है तो सरकार को दोषी बताया जा रहा है और देश हित के खिलाफ जाने के आरोप लगाये जा रहे हैं। देश हित, परमाणु करार व स्वतंत्रा विदेश नीति पर न तो यह सरकार कोई समझौता करने वाली है और न ही कांग्रेस एैसा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही देश को सर्वशक्तिमान बनाया और अब विदेश नीति, परमाणु करार ओर देश भक्ति पर कांग्रेस को किसी से प्रमाणपत्रा नहीं चाहिए। कांग्रेस अध्यक्षा ने कहा कि कांग्रेस भेदभाव फैलानी वाली एवं नफरत फैलाने वाली राजनीति नहीं करती। कांग्रेस सभी को साथ लेकर चलने व देश को जोड़ने वाल राजनीति करती है। आज सबको जोड़ने वाली राजनीति की ही जरूरत है। भाजपा का नाम लिए बगैर भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस उन दलों की तरह नहीं है जो नफरत फैलाने और घृणा के जरिए लोगों को बांटने की राजनीति करते हैं। उन्होंने आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्राी वाई एस राजशेखर रेड्डी की पीठ थपथपाते हुए कहा कि चार वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने आन्ध्रप्रदेश को विकास की दृष्टि से देश का नम्बर एक राज्य बना दिया है। यहां श्रमिकों, महिलाओं, किसानों, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों व दलितों के लिए अनेक योजनाओं की शुरुआत की गई है। उन्होने कहा कि आज देश का किसान निराश है, बेटी की शादी के लिए उसे भूमि गिरवी रखकर कर्ज लेना पडता है, कांग्रेस की इसी हालत को देखते हुए केन्द्र सरकार ने किसानों का 75 हजार करोड कर्ज माफ किया जिसका सबसे बडा लाभ आन्ध्रपदेश के किसानों को मिला। उन्होने कहा कि देश में कृषि ऋण पर ब्याज की दर 7 प्रतिशत है लेकिन आन्ध्रपेदश में यह दर 3 प्रतिशत है जिससे पता चलता है कि कांग्रेस की प्राथमिकता किसानों का हित है। उन्होंने बताया कि अनंतपुरम से शुरु की गई नेशनल रूरल इम्पाइमेंट गारंटी एक्ट की रोजगार योजना को अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने देश में 2000 से ज्यादा आबादी वाले कस्बों एवं गांवों को सडकों के जरिए शहरों से जोडने का निर्णय लिया है। उन्होंने बढती महंगाई का कारण अन्तराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल बताया। उन्होंने कहा कि यूपीए कार्यकाल में अन्तराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें 35 डाल प्रति बैरल से 147 डालर प्रति बैरल होने के बावजूद कांग्रेस ने कैरोसीन की कीमत नहीं बढाई तथा रसोई गैस की दरों में भी राहत दी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने अपने कार्यकाल में कई बार पेट्रोलियम पदार्थो की दरें बढाई।

1 टिप्पणी:

Harmeet ने कहा…

टुटेजा साहब आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है !
धन्यवाद !