मंगलवार, 2 सितंबर 2008

सीएनजी संकट: जेब और रोजी पर मार

लम्बी होती सी एन जी वाहनों की कतार
समस्या का कारण
पैट्रोल की बढ़ती कीमतें बढ़ा रही हैं सीएनजी वाहनों की संख्या
सीएनजी वाहनों की बढ़ती संख्या से लंबी हो रही है कतार
वाहनों क संख्या के अनुपात में नहीं हैं सीएनजी स्टेशन
सीएनज की कमी नहीं, कमी है फिलिंग संसाधनों की
भूमि न मिलने से नहीं लग रहे हैं सीएनजी स्टेशन
भूमि के लिए 40 आवेदनों में से मात्रा आधा दर्जन स्थलों का हुआ आवंटन
संसाधनों के लिए ईपीसीए से भी की मदद की गुहार
कब होगा समाधान
राजधानी में एक मेगा स्टेशन व छह नये फिलिंग स्टेशन बनाने की योजना
दिसंबर तक होगा समस्या का पूरी तरह समाधान
एनसीआर के वाहनों के लिए एनसीआर में बनेंगे सीएनजी स्टेशन
नये स्टेशन खुलने में लगेंगे अभी छह माह

अब तक हुए उपाय
मौजुदा स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने के लिए 54 हाईकैपिसिटी विदेशी कम्प्रेशर का दिया आर्डर18 कम्प्रेशर राजधानी पहुंचे
5 कम्प्रेशरों ने किया काम शुरु
अन्य कम्प्रेशर कर रहे हैं विद्युत भार की स्वीकृति का इंतजार

खपत और क्षमता
राजधानी में 13 लाख किलो सीएनजी खपत होती है प्रतिदिन
10.5 लाख किलो प्रतिदिन फिलिंग करने की है सभी स्टेशनों की क्षमता
कितने हैं सीएनजी स्टेशन
आईजीएल के स्टेशन 65पैट्रोल पम्पों पर लगे 75डीटीसी डिपो में लगे स्टेशन 23
सीएनजी स्टेशनों की संख्या है कुल 163


सीएनजी वाहनों की संख्या
सीएनजी बसें 22500
आटो रिक्शा 55000
छोटे माल वाहक वाहन 24500
एनसीआर से प्रतिदिन आने वाले सीएनजी वाहन लगभग 30 हजार
अन्य प्राइवेट वाहन 1.30 लाख


2.25 लाख प्राइवेट व सार्वजनिक वाहन प्रतिदिन भरवाते हैं सीएनजी
सीएनजी वाहनों की संख्या पिछले 2 वर्ष में
वर्ष 2005 एक लाख सीएनजी वाहन
वर्ष 2008 लगभग ढाई लाख सीएनजी वाहन
दो वर्ष में बढ़ गये 250 प्रतिशत सीएनजी यूजर्स


तपती धूप, भीषण गर्मी ऊपर से घंटो का इंतजार। रोटी कमाने घर से निकले हैं लेकिन नहीं पता कब नम्बर आयेगा और कब सवारी मिलेगी। फिर शाम हो गई तो मालिक को किराया भी देना होगा। साब यह संकट तो रोटी का संकट हो गया है, इस तरह कतार में लगे रहेंगे तो कब कमायेंगे और क्या खायेंगे। कभी दो घंटे तो कभी चार घंटे समय की बरबादी। क्या करें, और किससे कहें। सीएनजी स्टेशनों के लंबी कतार में खड़े आटो चालकों की यह पीढ़ा उनके तनावग्रस्त व थके चेहरे ही बता देते हैं। इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के तमाम सीएनजी स्टेशनों पर आटो चालक हों या फिर कार चालक सभी सीएनजी भरवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे है। दिन में कारों और आटो चालकों की कतार इन स्टेशनों के बाहर दिखाई देती है तो रात को ब्लूलाइन बसें कतार में दिखती हैं। लगभग एक लाख लोगों की रोजी रोटी सीएनजी पर निर्भर है। सीएनजी मिलेगी तो रोजी रोटी मिलेगी। यह तो रही आटो, टैक्सी चालकों और बस चालकों की पीढ़ा। निजी वाहन चालको ंकी पीढ़ा भी कम नहीं है। आफिस जाना हो या फिर बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना हो, घर व आफिस के तमाम जरूरी कामों की तरह अब सीएनजी की कतार में इंतजार करना भी एक जरुरी काम हो गया है। निजी वाहन चालकों के सामने दो ही रास्ते हैं या तो महंगा पैट्रोल भरवाकर अपनी जेब खाली करें या फिर कतार में लग कर सीएनजी भरवायें। गनीमत है सीएनजी स्टेशनों पर निजी कारों में फिलिंग के लिए अलग मशीनें हैं अन्यथा सीएनजी भरवाने के लिए भी आफिस से छुट्टी लेनी पड़ती। सीएनजी ने राजधानी को प्रदूषण से मुक्त करने का सपना तो पूरा कर दिया लेकिन सीएनजी स्टेशनों पर लंबी होती वाहनों की कतार एक एैसी समस्या बन गई है जो आटो व बस चालकों की रोजी रोटी छीन रही है और अन्य वाहन चालकों का कीमती समय।
सीएनजी संकट का कारण
संकट सीएनजी का नहीं बल्कि सीएनजी फिलिंग का है। पैट्रोल की बढ़ती कीमतो के कारण सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ रही है और वाहनों के अनुपात में न तो सीएनजी स्टेशनों की संख्या बढ़ रही है और न ही मौजुदा स्टेशनों की क्षमता बढ़ रही है। पिछले चार माह से सीएनजी स्टेशनो ंपर बढ़ते दबाव के बाद सीएनजी स्टेशनों की संख्या बढ़ाने व कम्प्रेशर क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम तो हुआ है लेकिन अभी उसका परिणाम आना बाकी है। इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) की अपनी मजबूरियां हैं। गेल से सीएनजी की कोई कमी न होने के बावजूद आईजीएल बेबस है क्योंकि आईजीएल को नये स्टेशनों के लिए भूमि ही नहीं मिल रही है। राजधानी में सीएनजी आपूर्ति की जिम्मेदारी आईजीएल पर है और गैस अथारिटी आफ इंडिया (गेल) की ओर से आईजीएल को प्रतिदिन 2 मिलियन स्टेण्डर्ड क्यूबिक मीटर सीएनजी गैस ़आवंटित है और राजधानी में सीएनजी की मौजुदा खपत 1.6 मिलियन स्टेण्डर्ड क्यूबिक मीटर है। इससे स्पष्ट है कि सीएनजी की कोई कमी नहीं है और आईजीएल को खपत से ज्यादा सीएनजी आवंटित हो रही है। सीएनजी स्टेशनो ंपर वाहनों की बढ़ती कतार से इनवायरनमेंट पोलुशन प्रिवेंशन एण्ड कण्ट्रोल अथारिटी (ईपीसीए) भी चिंतित है और ईपीसीए इस संबध में आईजीएल को अपनी चिंता से अवगत भी करा चुकी है। प्रतिदिन एनसीआर से आने वाले लगभग 30 हजार निजी सीएनजी वाहन भी इस समस्या को बढ़ा रहे है।
समाधान की क्या है योजना
सीएनजी के इस संकट का समाधान करने के लिए आईजीएल ने 54 हाईकैपिसिटी कम्प्रेशर विदेश से आयात किये हैं जिनमें से 18 आईजीएल को प्राप्त हो चुके हैं और पांच कम्प्रेशर प्रगति मैदान आईपी इस्टेट, मैकटाफ, ओखला फेस 1, नरेला व मयूर विहार में लगाये गये हैं लेकिन बाकी 13 कम्प्रेशर अभी भी चालू होने का इंतजार कर रहे हैं, इसका प्रमुख कारण आईजीएल स्टेशनों को इन कम्प्रेशरों के मुताबिक विद्युत भार स्वीकृत न होना है। इसके अलावा समय की बचत के लिए प्रिसेट डिस्पेंसर भी लगाये जा रहे हैं। सौ से अधिक डिस्पेंसर मंगाये गये हैं। आईजीएल ने नये स्टेशन खोलने की तैयारी भी की है लेकिन भूमि उपलब्ध न होना एक बड़ी समस्या है, भूमि के लिए लगभग 40 आवेदनों में से मात्रा अभी तक केवल सरोजनी नगर व रोहिणी में ही भूमि आवंटित हुर्ह है। आईजीएल ने एनसीाअर से आने वाले वाहनों को एनसीआर में ही स्टेशन लगाकर सीएनजी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है जबकि राजधानी के कंझावला में एक मेगा स्टेशन लगाये जाने के अलावा सीजीओ, मिन्टोरोड, रोहिणी फेस 2, मंगोलपुरी फेस 2, पीतमपुरा व सरोजनी नगर में नये स्टेशन लगाया जाना प्रस्तावित है। यह स्टेशन लगाने में कम से कम छह माह का वक्त लगेगा।
यूं तो होने लगेगी मारामारी
सीएनजी स्टेशनों पर कतार में लगे वाहन चालक कहते हैं कि यदि इसी तरह कतार बढ़ती रही तो सीएनजी के लिए मारामारी होने लगेगी। इन्द्रप्रस्थ स्टेशन के बाहर कतार में लगे वैशाली गाजियाबाद निवासी शील गुलाटी का कहना था कि जब तक सीएनजी स्टेशनों की संख्या नहीं बढ़ेगी संकट का समाधान नहीं होगा। वह बताते हैं कि कभी आधा घंटा तो कभी डेढ़ घंटा उन्हें कतार में लगता है। एक बड़ी कम्पनी के अधिकारी एस.शंकर कहते हैं कि उन्हें प्रतिदिन 45 मिनट सीएनजी के लिए खर्च करने पड़ते हैं। वह कहते हैं कि मौजुदा स्टेशनो ंपर मशीनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। वैशाली के ही अशोक सोनी कहते हैं कि वह एक दिन के अंतराल में सीएनजी भरवाने आते हैं और लंबा इतजार करते है। वह कहते हैं कि सरकार को कुछ करना चाहिए तभी समाधान होगा। सीएनजी संकट से प्रतिदिन दो तीन घंटे कतार में लगने वाले आटो चालक सुशील कुमार का कहना है कि जितना समय सीएनजी भरवाने में लगता है उतने समय में वह दो सौ रुपये कमा सकता है लेकिन रोजाना उसे यह नुकसान सहना पड़ता है। मोतीहारी से दिल्ली में आटो चलाने आये सुरेन्द्र यादव का कहना है कि अब तो यह रोज की समस्या है, क्या करें बच्चों को रोटी खिलानी है तो लाइन में लगना ही होगा। विनोद नगर निवासी बच्चे लाल का कहना था कि उसे आज दो घंटे लाइन में हो गये हैं लेकिन अभी तक नम्बर नहीं आया है, यही स्थिति रोज होती है। उसका कहना था कि मशीने बढ़ाकर समाधान किया जा सकता है।

2 टिप्‍पणियां:

Pawan Nishant ने कहा…

भइया, सीएनजी संकट पर शोध करने का इरादा है क्या। एक समस्या को केंद्र बिंदू बनाने के लिए आपका साधुवाद।
आपका-पवन निशान्त,मेरा ब्लाग-या मेरा डर लौटेगा.ब्लागसपोट.कॉम मो. नं. 09412777909

ummed Singh Baid "saadahak " ने कहा…

इतने मे घबरा गये,बारी है नैनो की.
लाखों गाङी आ रही, हालत क्या हो सङ्क की.
क्या हालत हो सङक की,सांसे घुट जायेगी.
खुद टाटा को अपनी नानी याद आयेगी.
कह साधक सीएनजी हो या तेल-पेट्रोल.
निकल जायेगा इंसानों का तेल-पेट्रोल.